क्या होता है E-Waste? जानिए कैसे इस कूड़े को किया जाता है खत्म

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आज की डिजिटल दुनिया में मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन जैसे ही ये डिवाइस पुराने या खराब होते हैं, एक नया और खतरनाक सवाल खड़ा होता है इनका क्या किया जाए? यहीं से E-Waste यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या शुरू होती है जो आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन चुकी है.

E-Waste क्या होता है?

E-Waste का पूरा नाम है इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट. इसमें वे सभी इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल डिवाइस शामिल होते हैं जो खराब हो चुके हैं, पुराने हो गए हैं या जिनका इस्तेमाल अब नहीं किया जाता. जैसे पुराने मोबाइल फोन, चार्जर, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी, वॉशिंग मशीन, प्रिंटर, हेडफोन, बैटरी और यहां तक कि स्मार्टवॉच भी E-Waste की श्रेणी में आती हैं.समस्या यह है कि इन उपकरणों में केवल प्लास्टिक या लोहे जैसे सामान्य पदार्थ ही नहीं होते, बल्कि लेड, मरकरी, कैडमियम और लिथियम जैसे जहरीले तत्व भी पाए जाते हैं जो पर्यावरण और इंसानी सेहत दोनों के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं.

E-Waste क्यों बनता है इतनी बड़ी समस्या?

आज टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल रही है. हर साल नए स्मार्टफोन मॉडल, नए फीचर्स और नए गैजेट लॉन्च होते हैं. ऐसे में लोग पुराने डिवाइस जल्दी बदल देते हैं, भले ही वे पूरी तरह खराब न हुए हों. यही आदत E-Waste को तेजी से बढ़ा रही है. इसके अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स इस तरह डिज़ाइन किए जाते हैं कि उनकी मरम्मत मुश्किल या महंगी हो जाती है. नतीजा यह होता है कि लोग रिपेयर कराने के बजाय नया डिवाइस खरीदना बेहतर समझते हैं.

E-Waste से पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?

E-Waste को अगर सही तरीके से न निपटाया जाए तो यह जमीन, पानी और हवा तीनों को प्रदूषित कर सकता है. खुले में फेंके गए इलेक्ट्रॉनिक कचरे से जहरीले केमिकल मिट्टी में मिल जाते हैं जो धीरे-धीरे भूजल को भी दूषित कर देते हैं.

अगर E-Waste को जलाया जाए तो उससे निकलने वाला धुआं हवा को जहरीला बना देता है जिससे सांस की बीमारियां, त्वचा रोग और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

E-Waste का सही निपटान कैसे किया जाता है?

E-Waste को खत्म करने का मतलब केवल उसे फेंक देना नहीं होता बल्कि उसे सही तरीके से प्रोसेस करना होता है. इसके लिए सबसे पहले E-Waste को सामान्य कचरे से अलग किया जाता है. इसके बाद विशेष रीसाइक्लिंग यूनिट्स में इसे भेजा जाता है, जहां इसे अलग-अलग चरणों में प्रोसेस किया जाता है.

सबसे पहले डिवाइस को तोड़कर उसके अलग-अलग हिस्से किए जाते हैं. फिर प्लास्टिक, धातु, कांच और सर्किट बोर्ड को अलग किया जाता है. उपयोगी धातुओं जैसे तांबा, सोना और एल्युमिनियम को दोबारा इस्तेमाल के लिए निकाला जाता है जबकि जहरीले पदार्थों को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाता है.

E-Waste रीसाइक्लिंग क्यों है जरूरी?

E-Waste रीसाइक्लिंग से न केवल पर्यावरण को बचाया जा सकता है बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की भी बचत होती है. इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में मौजूद कई कीमती धातुएं सीमित मात्रा में पाई जाती हैं. अगर इन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जाए तो नई माइनिंग की जरूरत कम हो जाती है.

इसके साथ ही रीसाइक्लिंग से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं और कचरा प्रबंधन सिस्टम को मजबूत किया जा सकता है. सही तरीके से की गई रीसाइक्लिंग अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद साबित होती है.

आम लोग E-Waste कम करने में क्या भूमिका निभा सकते हैं?

E-Waste की समस्या को सिर्फ सरकार या कंपनियां ही नहीं बल्कि आम लोग भी मिलकर कम कर सकते हैं. सबसे पहले तो हमें बार-बार डिवाइस बदलने की आदत पर रोक लगानी होगी. जब तक कोई डिवाइस ठीक से काम कर रहा है तब तक उसका इस्तेमाल करना चाहिए. अगर डिवाइस खराब हो जाए तो उसे फेंकने से पहले रिपेयर कराने की कोशिश करनी चाहिए. पुराने मोबाइल या लैपटॉप को किसी जरूरतमंद को दान करना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

E-Waste देने की सही जगह कौन-सी है?

आज कई इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां और ब्रांड्स E-Waste कलेक्शन प्रोग्राम चलाते हैं. इनके तहत आप अपने पुराने डिवाइस को अधिकृत कलेक्शन सेंटर पर जमा कर सकते हैं. इसके अलावा कई शहरों में सरकारी या निजी रीसाइक्लिंग सेंटर भी मौजूद हैं, जहां E-Waste को सुरक्षित तरीके से स्वीकार किया जाता है. कभी भी इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सामान्य घरेलू कूड़े के साथ नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि इससे उसका सही निपटान संभव नहीं हो पाता.

भविष्य में E-Waste की समस्या का समाधान कैसे होगा?

भविष्य में E-Waste की समस्या को कम करने के लिए सबसे जरूरी है बेहतर डिज़ाइन. अगर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स को इस तरह बनाया जाए कि वे लंबे समय तक चलें और आसानी से रिपेयर हो सकें तो कचरा अपने आप कम हो जाएगा.

इसके साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाना, सख्त नियम लागू करना और रीसाइक्लिंग सिस्टम को मजबूत करना भी बेहद जरूरी है. टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल तभी संभव है, जब हम उसके कचरे की जिम्मेदारी भी समझें.

E-Waste केवल एक कूड़े की समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारी आधुनिक जीवनशैली का नतीजा है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

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