पर्यावरण: जान—माल के नुकसान की नेताओं को परवाह नहीं

Spread the love

देश के समक्ष पर्यावरण परिवर्तन एक ऐसी चुनौती बन गई है, जिसकी कीमत हर साल हजारों लोगों की जान देकर और अरबों रुपयों के नुकसान से चुकानी पड़ती है। हर साल विकराल होती इस समस्या के नेता और राजनीतिक दल गंभीर दिखाई नहीं देते। वोट बैंक की राजनीति इस गंभीर समस्या पर भारी पड़ रही है। केंद्र और राज्यों की सरकारों के लिए यह समस्या प्राथमिक सूची में नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार साल 2025 के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में आपदाओं ने भयंकर कोहराम मचाया जिसमें सैकड़ों आम लोगों की जान चली गयी। बीते साल 2025 में प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश में 2700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। सबसे ज़्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड की गई, जबकि मध्य प्रदेश आपदा से हुई मौतों के मामले में दूसरे नंबर पर रहा। आंधी-तूफ़ान और बिजली गिरने की वजह से सबसे ज़्यादा मौतें बिहार में रिकॉर्ड की गई।  

उत्तर-पश्चिम भारत में, विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में बदल फटने, भूस्खलन और फ़्लैश फ्लड जैसी आपदाओं ने भयंकर कोहराम मचाया। बीते साल 1901 के बाद पिछले 124 साल में से तीसरी सबसे अधिक रिकॉर्ड की गयी।अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनी स्विस रे की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारत को प्राकृतिक आपदाओं से 12 अरब अमेरिकी डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये से अधिक) का नुकसान हुआ। यह 2013-2022 के औसत 8 अरब डॉलर से काफी ज्यादा था। स्विस रे की रिपोर्ट के अनुसार ये बड़े नुकसान उन क्षेत्रों में हुए जहां संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की संख्या ज्यादा है। इस विश्लेषण में पाया गया कि भारत में पिछले दो दशकों में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले कुल वार्षिक नुकसान का लगभग 63 फीसदी हिस्सा बाढ़ से जुड़ा हुआ है। इसका कारण भारत की जलवायु और भौगोलिक स्थिति है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय आपदा जोखिम न्यूनीकरण की रिपोर्टों के अनुसार भारत प्राकृतिक आपदाओं से सर्वाधिक आर्थिक नुकसान झेलने वाले शीर्ष देशों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य रिपोर्टों के अनुसार भारत को चरम मौसम की घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण हर साल भारी आर्थिक नुकसान होता है, लेकिन यह आंकड़ा 7 अरब डॉलर से काफी अधिक है, जो हाल के वर्षों में बढ़कर 8.7 अरब डॉलर (2021 की रिपोर्ट के अनुसार) या इससे भी अधिक (जैसे 2023 में 12 अरब डॉलर) हो गया है, क्योंकि बाढ़, तूफान और सूखे जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं। 2003-2012 के दशक के 3.8 अरब डॉलर के औसत से बढ़कर 2013-2022 के दशक में यह औसत 8 अरब डॉलर प्रति वर्ष हो गया है, जो 125% की वृद्धि है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में भारत को जलवायु-संबंधी खतरों से 87 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।

क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 (सीआरआई) की नई रिपोर्ट के अनुसार, 1995–2024 की अवधि में भारत दुनिया के उन शीर्ष 10 देशों में रहा है, जिन्हें जलवायु परिवर्तन से जुड़े चरम मौसम-कार्यों (बाढ़, तूफान, हीटवेव, सूखा आदि) का सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ा है। इस 30-वर्षीय अवधि में भारत में करीब 430 आपदाएं हुईं, जिनमें लगभग 80,000 लोगों की मौत हुई और 1.3 अरब से अधिक लोग प्रभावित हुए। अनुमानित आर्थिक हानि लगभग 170 अरब डालर रही। सीआरआई की रिपोर्ट बताती है कि भारत ‘लगातार खतरे’  की श्रेणी में आता है। देश में जलवायु आपदाएँ इतनी बार-बार हो रही हैं कि एक घटना के प्रभाव से पूरी तरह उबरने से पहले ही अगली आ जाती है। नहरों, हिमालयी नदियों, समुद्री तटीय इलाकों और कृषि-प्रधान क्षेत्रों के लिए यह विशेष रूप से चिंता की बात है। 

भारत में जलवायु परिवर्तन से सिर्फ मौसम ही नहीं बिगड़ रहा, बल्कि यह बदलाव लोगों की सेहत पर भी सीधा हमला कर रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए इस अध्ययन के मुताबिक भारत के जलवायु संवेदनशील जिलों में बच्चों के कुपोषित होने का खतरा अन्य जिलों की तुलना में 25 फीसदी अधिक है। इन जिलों में महिलाओं के घर पर प्रसव और बच्चों के ठिगने होने की आशंका भी अधिक है। मतलब कि जलवायु संकट का सीधा असर मां और शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस कड़ी में दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ के शोधकर्ताओं ने अपने एक नए अध्ययन में भारत में जलवायु संकट और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को उजागर किया है। अध्ययन से पता चला है जलवायु जोखिम वाले जिलों के बच्चों के कुपोषित होने की आशंका 25 फीसदी अधिक है, यानी इन जिलों में बच्चों का वजन उम्र के अनुपात में सामान्य से कम होने का खतरा कहीं ज्यादा है।

यूनेस्को की एक नई रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि अत्यधिक गर्मी के कारण बच्चे अपनी पढ़ाई में डेढ़ साल तक पीछे रह सकते हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़, जंगल की आग, गर्मी और तूफान जैसी आपदाओं ने पिछले 20 सालों में 75% मामलों में स्कूल बंद करवाए हैं। बांग्लादेश, दक्षिण सूडान और भारत जैसे देशों में बच्चे स्कूल नहीं लौट पाते, क्योंकि उनके घर, स्कूल और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। भारत में 15 लाख से ज्यादा स्कूल हैं, जिनमें से कई में न तो पंखे हैं और न ही ठंडक की कोई व्यवस्था। शहरों में, कम आय वाले इलाके खराब शहरी नियोजन और हरियाली की कमी के कारण असमान रूप से प्रभावित होते हैं। ग्रामीण इलाकों और गरीब बस्तियों में स्थिति और खराब है। इन तमाम रिपोर्टों से जाहिर है कि नए साल और आने वाले भविष्य में पर्यावरणीय चुनौतियां और भी गंभीर होंगी। इसकी फिक्र नेताओं और राजनीतिक दलों को नहीं है। उन्हें यदि फिक्र है तो ऐसे तात्कालिक मुद्दों की जिनसे वोट बटोरा जा सके। देश चलाने वालों ने वक्त रहते इन समस्याओं के प्रति यदि गंभीर रुख नहीं अपनाया तो यह हालात देश को भयानक अंधकार की तरफ ले जाने वाले साबित होंगे। 

  • Related Posts

    Maharashtra Politics में हलचल मचाने वाली कौन-सी बड़ी घोषणा 8 February को करने वाले थे Ajit Pawar?

    Spread the love

    Spread the loveमहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने अंतिम समय से कुछ दिनों पहले ही यह संकेत दे दिये थे कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों धड़ों में अब…

    Shashi Tharoor का ‘बगावती’ तेवर! कोच्चि में हुए अपमान के बाद कांग्रेस की हाई-लेवल बैठक से बनाई दूरी

    Spread the love

    Spread the loveशशि थरूर कांग्रेस की अहम मीटिंग में शामिल नहीं होंगे सूत्रों के अनुसार, यह फैसला तब लिया गया जब थरूर को कोच्चि में एक महापंचायत कार्यक्रम में “अपमानित”…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    भारत की ओर से AR Rahman ने बढ़ाई महफिल की शान

    • By rajnews
    • January 30, 2026
    • 4 views
    भारत की ओर से AR Rahman ने बढ़ाई महफिल की शान

    T20 World Cup से पहले Pakistan का बड़ा दांव, कप्तान Salman Ali Agha No.3 पर करेंगे बल्लेबाजी

    • By rajnews
    • January 30, 2026
    • 4 views
    T20 World Cup से पहले Pakistan का बड़ा दांव, कप्तान Salman Ali Agha No.3 पर करेंगे बल्लेबाजी

    Maharashtra Politics में हलचल मचाने वाली कौन-सी बड़ी घोषणा 8 February को करने वाले थे Ajit Pawar?

    • By rajnews
    • January 30, 2026
    • 4 views
    Maharashtra Politics में हलचल मचाने वाली कौन-सी बड़ी घोषणा 8 February को करने वाले थे Ajit Pawar?

    Bharti Singh और Haarsh ने किया बेटे के नाम का ऐलान, Instagram पर शेयर की Cute Family Photo

    • By rajnews
    • January 29, 2026
    • 4 views
    Bharti Singh और Haarsh ने किया बेटे के नाम का ऐलान, Instagram पर शेयर की Cute Family Photo

    Acne और दाग-धब्बों की छुट्टी! रोज रात पिएं ये देसी ड्रिंक, मिलेगी Flawless Glowing Skin

    • By rajnews
    • January 29, 2026
    • 5 views
    Acne और दाग-धब्बों की छुट्टी! रोज रात पिएं ये देसी ड्रिंक, मिलेगी Flawless Glowing Skin

    FY27 में 7.2% GDP का अनुमान, AI पर फोकस, आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का पूरा निचोड़ 6 लाइन में जानें

    • By rajnews
    • January 29, 2026
    • 5 views
    FY27 में 7.2% GDP का अनुमान, AI पर फोकस, आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का पूरा निचोड़ 6 लाइन में जानें