Pushkar Fair 2025: लोक संस्कृति का वाहक पुष्कर मेला

Spread the love

पुष्कर मेला थार मरुस्थल का एक लोकप्रिय व रंगों से भरा मेला है। पुष्कर झील भारतवर्ष में पवित्रतम स्थानों में से एक है। प्राचीनकाल से लोग यहां पर प्रतिवर्ष कार्तिक मास में एकत्रित हो भगवान ब्रह्मा की पूजा उपासना करते हैं। पुष्कर मेले को खास माना जाता है क्योंकि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व का एक अनूठा संगम है।राजस्थान में अजमेर से लगभग 11 किलीमीटर दूर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुष्कर है। यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को मेला लगता है जिसमें बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। यहां पर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है जो इस मेले की शोभा को और बढ़ा देते हैं। पुष्कर मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक लगता है। मेलों के रंग राजस्थान में देखते ही बनते हैं। ये मेले मरुस्थल के गांवों के कठोर जीवन में एक नवीन उत्साह भर देते हैं। लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सज-धजकर जगह-जगह पर नृत्य गान आदि समारोहों में भाग लेते हैं। यहां पर काफी मात्रा में भीड़ देखने को मिलती है। लोग इस मेले को श्रद्धा, आस्था और विश्वास का प्रतीक मानते हैं।

पुष्कर मेला थार मरुस्थल का एक लोकप्रिय व रंगों से भरा मेला है। पुष्कर झील भारतवर्ष में पवित्रतम स्थानों में से एक है। प्राचीनकाल से लोग यहां पर प्रतिवर्ष कार्तिक मास में एकत्रित हो भगवान ब्रह्मा की पूजा उपासना करते हैं। पुष्कर मेले को खास माना जाता है क्योंकि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व का एक अनूठा संगम है। पुष्कर मेले की मुख्य विशेषताओं में दुनिया का सबसे बड़ा ऊँट और पशुधन मेला होना, जिसमें ऊँट, घोड़े, और अन्य मवेशियों की खरीद-बिक्री होती हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों का मिश्रण शामिल है। इसमें सांस्कृतिक प्रदर्शन, पारंपरिक खेल जैसे कुश्ती और कबड्डी, और ऊँट व घोड़ों के लिए सजगता प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा, मेले में हस्तशिल्प बाजार और पवित्र पुष्कर झील के किनारे धार्मिक अनुष्ठान भी होते हैं। जो इसे एक बहुआयामी उत्सव बनाते हैं। 

पुष्कर मेले की मुख्य विशेषताओं में दुनिया का सबसे बड़ा ऊँट और पशुधन मेला होना, जिसमें ऊँट, घोड़े, और अन्य मवेशियों की खरीद-बिक्री होती है, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों का मिश्रण शामिल है। इसमें सांस्कृतिक प्रदर्शन, पारंपरिक खेल जैसे कुश्ती और कबड्डी, और ऊँट व घोड़ों के लिए सजगता प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा, मेले में हस्तशिल्प बाजार और पवित्र पुष्कर झील के किनारे धार्मिक अनुष्ठान भी होते हैं, जो इसे एक बहुआयामी उत्सव बनाते हैं।

राजस्थान में त्यौहारों, पर्वो एवं मेलों की अनूठी परम्परा एवं संस्कृति है वैसी देश में अन्यत्र कहीं मिलना कठिन है। यहां का प्रत्येक मेला एवं त्यौहार लोक जीवन की किसी किवदन्ती या किसी ऐतिहासिक कथानक से जुड़ा हुआ है। इसलिए इनके आयोजन में सम्पूर्ण लोक जीवन पूरी सक्रियता से भाग लेता है। इन मेलों में राजस्थान की लोक संस्कृति जीवन्त हो उठती है। इन मेलों के अपने गीत हैं, जिनके प्रति जन साधारण की गहरी आस्था दृष्टिगोचर होती है। इससे लोग एकता के सूत्र में बंधें रहते हैं। राजस्थान में अधिकांश मेले पर्व व त्यौहार के साथ जुड़े हुए हैं। 

मेलों का महत्व देवताओं एवं देवियों की आराधना को लेकर भी है क्योंकि देर्वाचन से मानव को शान्ति प्राप्त होती है। वैसे तो राजस्थान के विभिन्न भागों में बहुत बड़ी संख्या में मेले आयोजित किए जाते हैं, परन्तु कुछ गिने-चुने मेलों का अपना ही महत्व होता है। यहां के धार्मिक मेलों में सम्बंधित धर्म अनुयायियों के अतिरिक्त अन्य धर्म के लोग एवं अन्य जाति के लोग भी खुलकर भाग लेते हैं।

मेला स्थल से परे पुष्कर नगरी का माहौल एक तीर्थनगरी सरीखा होता है। कार्तिक में स्नान का महत्व हिंदू मान्यताओं में वैसे भी काफी ज्यादा है। इसलिए यहां साधु भी बडी संख्या में नजर आते हैं। मेले के शुरुआती दिन जहां पशुओं की खरीद-फरोख्त पर जोर रहता है। वहीं बाद के दिनों में पूर्णिमा पास आते-आते धार्मिक गतिविधियों का जोर हो जाता है। श्रद्धालुओं के सरोवर में स्नान करने का सिलसिला भी पूर्णिमा को अपने चरम पर होता है। 

पुष्कर मेले के दौरान इस नगरी में आस्था और उल्लास का अनोखा संगम देखा जाता है। पुष्कर को इस क्षेत्र में तीर्थराज कहा जाता है और पुष्कर मेला राजस्थान का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। पुष्कर मेले की प्रसिद्धि का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि ऐतिहासिक धरोहरों के रूप में ताजमहल का जो दर्जा विदेशी सैलानियों की नजर में है। ठीक वही महत्व त्यौहारों से जुडे पारम्परिक मेलों में पुष्कर मेले का है।

पुष्कर को इस क्षेत्र में तीर्थराज कहा जाता है। क्योंकि यहां समूचे ब्रह्मांड के रचयिता माने जाने वाले ब्रह्मा जी का निवास है। पुष्कर के महत्व का वर्णन पद्मपुराण में मिलता है। इसके अनुसार एक समय ब्रह्मा जी को यज्ञ करना था। उसके लिए उपयुक्त स्थान का चयन करने के लिए उन्होंने धरा पर अपने हाथ से एक कमल पुष्प गिराया। वह पुष्प अरावली पहाडियों के मध्य गिरा और लुढकते हुए दो स्थानों को स्पर्श करने के बाद तीसरे स्थान पर ठहर गया। जिन तीन स्थानों को पुष्प ने धरा को स्पर्श किया वहां जलधारा फूट पडी और पवित्र सरोवर बन गए। सरोवरों की रचना एक पुष्प से हुई इसलिए इन्हें पुष्कर कहा गया। प्रथम सरोवर कनिष्ठ पुष्कर, द्वितीय सरोवर मध्यम पुष्कर कहलाया। जहां पुष्प ने विराम लिया वहां एक सरोवर बना, जिसे ज्येष्ठ पुष्कर कहा गया। ज्येष्ठ पुष्कर ही आज पुष्कर के नाम से विख्यात है। पुष्कर में लगभग चार सौ मंदिर है। इसीलिए इसे मंदिर नगरी भी कहा जाता है।

महाभारत में पुष्कर राज के बारे में लिखा है कि तीनों लोकों में मृत्यु लोक महान है और मृत्यु लोक में देवताओं का सर्वाधिक प्रिय स्थान पुष्कर है। चारों धामों की यात्रा करके भी यदि कोई व्यक्ति पुष्कर सरोवर में डुबकी नहीं लगाता है तो उसके सारे पुण्य निष्फल हो जाते हैं। यही कारण है कि तीर्थ यात्री चारो धामों की यात्रा के बाद पुष्कर की यात्रा जरूर करते हैं। तीर्थ राज पुष्कर को पृथ्वी का तीसरा नेत्र भी माना जाता है। पुष्कर नगरी में विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है तो दूसरी तरफ दक्षिण स्थापत्य शैली पर आधारित रामानुज संप्रदाय का विशाल वैकुंठ मंदिर। इनके अलावा सावित्री मंदिर, वराह मंदिर के अलावा अन्य कई मंदिर हैं। पास में ही एक छोटे से मन्दिर में नारद जी की मूर्ति। एक मन्दिर में हाथी पर बैठे कुबेर तथा नारद की मूर्तियां हैं।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में उल्लिखित है कि अपने मानस पुत्र नारद द्वारा सृष्टिकर्म करने से इन्कार किए जाने पर ब्रह्मा ने उन्हें शाप दे दिया कि तुमने मेरी आज्ञा की अवहेलना की है। अतः मेरे शाप से तुम्हारा ज्ञान नष्ट हो जाएगा और तुम गन्धर्व योनि को प्राप्त करके कामिनियों के वशीभूत हो जाओगे। तब नारद ने भी दुःखी पिता ब्रह्मा को शाप दिया कि आपने बिना किसी कारण मुझे शाप दिया है। अतः मैं भी आपको शाप देता हूं कि तीन लोक में आपकी पूजा नहीं होगी और आपके मंत्र, श्लोक कवच आदि का लोप हो जाएगा। तभी से ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती है। मात्र पुष्कर क्षेत्र में ही वर्ष में एक बार उनकी पूजा-अर्चना होती है।

कई आस्थावान लोग पुष्कर परिक्रमा भी करते हैं। सुबह और शाम के समय यहां आरती होती है। वह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। इतनी विशेषताओं के कारण पुष्कर को तीर्थराज कहने के अलावा देश का पांचवां धाम भी कहा जाता है। पुष्कर सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा पर पर्व स्नान का बडा महत्व माना गया है। क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा पर ही ब्रह्मा जी का वैदिक यज्ञ संपन्न हुआ था। तब यहां सम्पूर्ण देवी-देवता एकत्र हुए थे। उस पावन अवसर पर पर्व स्नान की परम्परा सदियों से चली आ रही है। जिस प्रकार प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है उसी प्रकार से इस तीर्थ को पुष्करराज कहा जाता है। 

हिन्दुओं के लिए पुष्कर एक पवित्र तीर्थ व महान पवित्र स्थल है। वर्तमान समय में इसकी देख-रेख की व्यवस्था सरकार ने सम्भाल रखी है। अतः तीर्थस्थल की स्वच्छता बनाए रखने में भी काफी मदद मिली है। यात्रियों की आवास व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। यहां आने वाला हर तीर्थयात्री यहां की पवित्रता और सौंदर्य की मन में याद संजो कर ही लौटता है।

  • Related Posts

    Mumbai के Taj Hotel का 59 साल पुराना बिल Viral, जब 1 तोला Gold से भी महंगा था एक रात का कमरा!

    Spread the love

    Spread the loveमुंबई में सबसे ज्यादा फेमस समुद्र किनारे स्थित ताजमहल पैलेस एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। दुनियाभर से लेकर भारत के दूसरे राज्यों से भी लोग मुंबई पहुंचते हैं। मुंबई आकर लोग ताज होटल के पास तस्वीरें जरुर खिंचवाते हैं। लोगों के…

    National Youth Day 2026: हर साल 12 जनवरी को मनाया जाता है राष्ट्रीय युवा दिवस, जानिए इतिहास और महत्व

    Spread the love

    Spread the loveहर साल 12 जनवरी को भारत में नेशनल यूथ डे मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा दिवस सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि भारत के आत्मविश्वास की याद है। यह…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    भारत की ओर से AR Rahman ने बढ़ाई महफिल की शान

    • By rajnews
    • January 30, 2026
    • 5 views
    भारत की ओर से AR Rahman ने बढ़ाई महफिल की शान

    T20 World Cup से पहले Pakistan का बड़ा दांव, कप्तान Salman Ali Agha No.3 पर करेंगे बल्लेबाजी

    • By rajnews
    • January 30, 2026
    • 4 views
    T20 World Cup से पहले Pakistan का बड़ा दांव, कप्तान Salman Ali Agha No.3 पर करेंगे बल्लेबाजी

    Maharashtra Politics में हलचल मचाने वाली कौन-सी बड़ी घोषणा 8 February को करने वाले थे Ajit Pawar?

    • By rajnews
    • January 30, 2026
    • 4 views
    Maharashtra Politics में हलचल मचाने वाली कौन-सी बड़ी घोषणा 8 February को करने वाले थे Ajit Pawar?

    Bharti Singh और Haarsh ने किया बेटे के नाम का ऐलान, Instagram पर शेयर की Cute Family Photo

    • By rajnews
    • January 29, 2026
    • 4 views
    Bharti Singh और Haarsh ने किया बेटे के नाम का ऐलान, Instagram पर शेयर की Cute Family Photo

    Acne और दाग-धब्बों की छुट्टी! रोज रात पिएं ये देसी ड्रिंक, मिलेगी Flawless Glowing Skin

    • By rajnews
    • January 29, 2026
    • 5 views
    Acne और दाग-धब्बों की छुट्टी! रोज रात पिएं ये देसी ड्रिंक, मिलेगी Flawless Glowing Skin

    FY27 में 7.2% GDP का अनुमान, AI पर फोकस, आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का पूरा निचोड़ 6 लाइन में जानें

    • By rajnews
    • January 29, 2026
    • 5 views
    FY27 में 7.2% GDP का अनुमान, AI पर फोकस, आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का पूरा निचोड़ 6 लाइन में जानें