मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज पूर्वी चंपारण जिला के बंजरिया थाना, चौलाहा बाजार मैदान में एनडीए कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी यहां बड़ी संख्या में उपस्थित हुए हैं, आपका अभिनंदन करता हूं। वर्ष 2005 से बिहार को आगे बढ़ाने में हमलोग निरंतर लगे हुए हैं। आप सब जानते हैं कि पहले की सरकार ने कोई काम नहीं किया। पहले बिहार का बहुत बुरा हाल था। विकास का कोई काम नहीं होता था, जबकि जनता ने 15 साल उनलोगों को मौका दिया। उस समय शाम के बाद लोग घरों से बाहर निकलने में डरते थे। समाज में काफी विवाद होता था। पढ़ाई और इलाज का कोई इंतजाम नहीं था। सड़कें जर्जर थी। बिजली की आपूर्ति नहीं के बराबर हुआ करती थी। हम लोगों को विकास कार्य करते 20 साल हो गये हैं। अब प्रदेश में किसी प्रकार का डर और भय का वातावरण नहीं है। चारों तरफ शांति का माहौल कायम है। हमलोगों ने वर्ष 2006 से ही कब्रिस्तानों की घेराबंदी शुरू कराई। अब बड़े पैमाने पर कब्रिस्तानों की घेराबंदी की जा चुकी है। अब हिन्दू-मुस्लिम के बीच कोई झगड़ा झंझट नहीं होता है। मंदिरों में पहले चोरी की घटनाएं हुआ करती थी, जिसे देखते हुए 60 वर्ष से अधिक पुराने मंदिरों की घेराबंदी भी की जा रही है। हर तबके को आगे बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। बिहार में शिक्षा की स्थिति में सुधार लाने के लिए बड़ी संख्या में स्कूल खोले गए तथा नियोजित शिक्षकों की बहाली की गई। बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2 लाख 58 हजार सरकारी शिक्षकों की बहाली की गई है और आगे भी शिक्षकों की बहाली जारी है। नियोजित शिक्षकों की मामूली परीक्षा लेकर उन्हें सरकारी शिक्षक बनाया गया है। अब तक 2 लाख 62 हजार नियोजित शिक्षक सरकारी शिक्षक बन चुके हैं। इस प्रकार कुल 5 लाख 20 हजार सरकारी शिक्षकों की बहाली हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 से पहले बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी बदहाल थी। उस समय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र 39 मरीज प्रतिमाह इलाज कराने पहुंचते थे। हम लोगों ने वर्ष 2006 से सभी सरकारी अस्पतालों में दवा एवं इलाज की मुफ्त व्यवस्था सुनिश्चित कराई है। जिसका परिणाम है कि अब प्रतिमाह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में औसतन 11 हजार 600 मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। बिहार में पहले मात्र 6 मेडिकल कॉलेज थे, अब इनकी बढ़कर संख्या 12 हो गई है। 20 जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, शेष 7 जिलों में भी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में कार्य जारी है। हर प्रकार से विकास का काम किया जा रहा है। सभी 6 पुराने मेडिकल कॉलेजों में से पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का विस्तार कर उसे 5400 बेड तथा अन्य 5 पुराने मेडिकल कॉलेज को भी 2500 बेड का बनाया जा रहा है। आई०जी०आई०एम०एस० का विस्तार कर उसे 3 हजार बेड का बनाया गया है। राज्य में बड़ी संख्या में सड़कों एवं पुल-पुलियों का निर्माण कराया गया है। हमलोगों ने वर्ष 2016 में बिहार के सुदूरवर्ती इलाके से पटना पहुंचने का 6 घंटे का लक्ष्य निर्धारित किया था। उस लक्ष्य को प्राप्त कर लेने के बाद अब 5 घंटे में बिहार के किसी भी कोने से पटना पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 में सात निश्चय योजना के तहत हर घर बिजली, हर घर नल का जल, हर घर शौचालय निर्माण, हर घर तक पक्की गली और नाली का निर्माण सहित अन्य बुनियादी सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। वर्ष 2020 में सात निश्चिय योजना-02 के तहत ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट, बाल हृदय योजना आदि का लाभ लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2020 में युवाओं को 10 लाख सरकारी नौकरी एवं 10 लाख रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और 39 लाख लोगों को रोजगार दे दिया गया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ही 50 लाख से अधिक नौकरी एवं रोजगार दे दिया जायेगा। हमलोगों ने अब तय किया है कि अगले 5 वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी / रोजगार दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का बजट लगातार बढ़ रहा है। महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है। हमलोगों ने वर्ष 2006 से पंचायती राज संस्थाओं में तथा वर्ष 2007 से नगर निकाय के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसके तहत अब तक 4 चुनाव संपन्न हो चुके हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं चुनकर आई हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर स्तर पर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2013 में पुलिस की बहाली में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण तथा वर्ष 2016 में सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। बिहार में स्वयं सहायता समूहों की संख्या पहले काफी कम थी। हमलोगों ने वर्ष 2006 में विश्व बैंक से कर्ज लेकर इसकी संख्या बढ़ानी शुरू की। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का नाम जीविका दीदी हमने ही दिया, जिससे प्रेरित होकर उस समय की केंद्र सरकार ने पूरे देश में इसका नाम आजीविका किया। बिहार में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 40 लाख हो गई हैं। वर्ष 2024 से शहरी क्षेत्रों में भी स्वयं सहायता समूहों का गठन शुरू कराया गया है। जिनसे अब तक 3 लाख 85 हजार जीविका दीदियां जुड़ चुकी हैं। मदरसों को सरकारी मान्यता देकर उनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों को सरकार शिक्षक के बराबर वेतन दिया जा रहा है। वर्ष 2023 में बिहार में जातीय आधारित गणना कराकर लोगों की आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया तथा गरीब परिवारों को भी चिन्हित किया गया। इसके तहत 94 लाख गरीब परिवार चिन्हित किए गए जिन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना शुरू किया गया। अब हमलोगों ने तय किया है कि ऐसे सभी चिन्हित परिवारों को एक साथ सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिसको लेकर एक उच्चस्तरीय कमिटी का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का विकास बहुत तेजी से हो रहा है और हम सभी के सहयोग से आगे भी इसी प्रकार होता रहेगा। वर्ष 2024 के दिसंबर एवं 2025 के जनवरी-फरवरी माह में मैंने प्रगति यात्रा के दौरान सभी जिलों में जाकर विकास कार्यों को देखा और जो कमी रही उसे पूरा करने के लिए 430 नई योजनाओं की स्वीकृति दी है जिन पर 50 हजार करोड़ रुपये की लागत आयेगी। इन सभी योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। हाल में हमने कुछ नये कदम उठाये हैं जिससे सभी को काफी फायदा होगा। गांवों में शादी समारोह आयोजित करने के लिए सरकार सभी पंचायतों में विवाह भवन का निर्माण करायेगी। इस पर 4 हजार 26 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जायेगी। जीविका दीदियों को बैंकों से मिलने वाली ऋण के ब्याज को 10 से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। जीविका के सभी कर्मियों को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। दीदी की रसोई में खाने की कीमत को 40 रुपये से घटाकर 20 रुपये कर दिया गया है। पंचायत के सभी प्रतिनिधियों, आशा कर्मी, रसोईया, आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका, कृषि सलाहकार आदि के मानदेय में बढ़ोत्तरी की गयी है। सभी वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को मिलने वाली पेंशन की राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रूपये कर दिया गया है। इससे बड़े संख्या में लोगों को फायदा हो रहा है। वर्ष 2018 में हर घर बिजली पहुँचा दी गयी। सरकार द्वारा शुरू से ही बहुत सस्ती दर पर बिजली दी गयी है। अब लगभग सभी घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली मुफ्त दी जा रही है। सरकार की तरफ से सभी इच्छुक लोगों के घरों पर सोलर पैनल लगाये जायेंगे। हाल ही में महिलाओं के रोजगार के लिए एक नई योजना मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की स्वीकृति दी गयी है, जिससे जीविका दीदियों सहित सभी महिलाओं को फायदा होगा। इसके अन्तर्गत हर घर की एक महिला को रोजगार शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये की राशि दी जायेगी। जिनका रोजगार अच्छा चलेगा उन्हें 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जायेगी। यह काम इसी सितम्बर माह से शुरू हो जायेगा। बिहार का बजट लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2005-06 में नई सरकार बनने के समय राज्य का बजट मात्र 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे वर्ष 2006-07 में बढ़ाकर 34 हजार करोड़ रुपये किया गया और यह बढ़ते-बढ़ते अब 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।








